शुक्रवार, 31 जनवरी 2020

जिंदगी ख्वाबों में तू मेरी यादों में तू
जिंदगी तू हकीकत में क्यूँ नहीं ?
@ सुधाकर आशावादी 
जिंदगी ख्वाबों में तू , यादों में तू 
जिंदगी तू हकीकत क्यूँ नहीं ?
@ सुधाकर आशावादी 

शुक्रवार, 31 अगस्त 2018

कृपा बरसे तुझ पर सारे जहान की
तू धरती पे रहे बात हों आसमाँ की
तेरी प्रगति पे गर्व की अनुभूति हो
हो ऐसी किस्मत मेरे हिन्दोस्तां की.
@ सुधाकर आशावादी

मंगलवार, 6 मार्च 2018

फेंक कंकड़ शान्त गहरी झील में
पूछते पानी में हलचल क्यूँ मची ?
कितने समझौते करेगी ज़िंदगी
बेबसी तेरी समझ आती मुझे।

शुक्रवार, 16 फ़रवरी 2018

तेरी इंसानियत ने मुझे इस कदर लुभाया है
भूल गया हूँ मैं मज़हब की संकरी गलियाँ .
@ सुधाकर आशावादी

गुरुवार, 15 फ़रवरी 2018

मुझे पसंद आया उसका अंदाज़
मज़हबी सोच से परे कुछ खास
इंसानी रिश्तों का मधुर एहसास
राह-ए-सफर में हुआ अनायास.