गुरुवार, 7 नवंबर 2013

दर्पण :
सिर्फ चेहरा देखा दर्पण में 
फिर इठलाये 
चेहरे की पुस्तक पर 
विभिन्न अदाओं से भरे 
अपने चेहरे दिखाए 
मगर अफ़सोस 
अपने मन का दर्पण 
कभी न देख पाये। 
 - सुधाकर आशावादी 

दम्भ :
एक अदद आदमी ने ओढ़ ली चादर 
कुछ चुनिन्दा क्लिष्ट शब्दों से भरी 
और अपने भीतर पाल लिया दम्भ 
विद्वान होने का / जतलाने का। 
- सुधाकर आशावादी 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें